Thursday, 2 May 2019

कुछ पंक्तियों की जिंदगी......

कुछ इस तरह जिंदगी बिती,
इन पन्नों में ।
पन्नों में हि हैं दफन,
कुछ खावब जिंदगी के।
खावाब हैं आसमा​ में उडने के,
फिर भी  उलझी सी है जिंदगी,
इन पन्नों में।
खावाबो कि पतंग,
उडी आसमा कि ओर,
फिर भी बंधी सी है जिंदगी,
इन्हीं पन्नों में।
गुम हो गई है पतंग
खावाबो कि उम्मीदो के आसमा में
फिर भी उलझी सी है जिंदगी
इन ही पन्नों में।
-सोनेश

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